Saturday, June 13, 2009

मैं उसका ख़्याल हूँ

जानता हूँ कि,
वो प्यार मुझसे करती है.

मैं चाहता हूँ,
उसको हमेशा घेरे रहूँ।
पर वो है कि,
अकेले में बात करती है।

मुझसे बातें कर,
उसको सुकून मिलता है।

मुझ पर व्यंग्य भी कसती है,
हँसती है वो,
मुझे झूठा भी कहती है,
और झगड़ती भी है।

क्यों ना झगड़े ?
मैं उसका हूँ
वो मुझको अपना समझती है

उसे हर वक़्त मेरा ही ख़याल रहता है
और मैं ये भी जानता हूँ कि
मैं उसका 'ख़्याल' हूँ......

22 comments:

ओम आर्य said...

mai usaka khyaal hu .......yah khyaal hi achchha hai.

महेन्द्र मिश्र said...

bahut hi badhiya rachana likhi hia.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

भावप्रद, इस 'खयाल' नें ही तो दुनियॉं के हर 'मैं' को संबल दिया है, आभार .

VaRtIkA said...

"मैं उसका हूँ
वो मुझको अपना समझती है"

दी...यह ख़याल मात्र कि आप किसी के हैं, और कोई आपको अपना मानता है, इतनी ख़ुशी और सुरक्षा कि भावना देता है.... :)

बहुत प्यारी तरह से आपने ख़याल के ख्यालों को सामने रखा... प्यारी सी रचना... :)

विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत बढ़िया,अच्छा लगा,बधाई स्वीकारे,

ख्याल का ख्याल रखना मजबूरी है,
क्योंकि दिल नही मानता है,
बस अपनी ही ठानता है.
अपने प्यार उसे एतबार है,
शायद इसी का नाम प्यार है.

ρяєєтι said...

waah.. hamesha ki tarah behtarin khayaal...
Apna hai tabhi to -
jhagdta hai,
manata hai,
samajhta hai,
aur khyaal karta hai...!

कंचनलता चतुर्वेदी said...

वाह!कितनी अच्छी अभिव्यक्ति दी है आप ने....
.......कंचनलता चतुर्वेदी

VIJAY TIWARI " KISLAY " said...

जब कोई किसी का अपना हो जाता है तो उसकी बहुत सी चीजों में अपना अधिकार सा समझने लगता है, उसे विश्वास भी रहता है कि मेरी किसी बात का उसे बुरा नहीं लगेगा , या हम यूँ भी कह सकते हैं कि हम सामने वाले के बारे में इतना अधिक जानने लगते हैं कि हम खुद ही ऐसी बात नहीं करते जिसके बारे में कोई संदेह हो . इसीलिए लड़ना, झगड़ना,व्यंग्य करना, हँसना आदि ये सब स्नेह और प्यार के अर्न्तगत आने लगते हैं
इन्ही सामान्य बातों को कविता का स्वरूप देकर हमारे सामने सुन्दर अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने के लिए आभार.
- विजय

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

vah vahut hi sunder avhivyakti hai
kitne acche tarike se vhavnao ko vyakt kiya hai

anubhooti said...

saral shabdon mein ,gahan anubhooti ki sahaj abhivyakti

रश्मि प्रभा... said...

khubsoorat khyaal......

श्याम सखा 'श्याम' said...

जानेमन इतनी तुम्हारी याद आती है कि बस....
इस गज़ल को पूरा पढें यहां
http//:gazalkbahane.blogspot.com/ पर एक-दो गज़ल वज्न सहित हर सप्ताह या
http//:katha-kavita.blogspot.com/ पर कविता ,कथा, लघु-कथा,वैचारिक लेख पढें

satish kundan said...

और मैं ये भी जानता हूँ कि
मैं उसका 'ख़्याल' हूँ......khubsurat rachna jo dil ko chhuti hai..mere blog pe aapka swagat hai..

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

नमस्कार ज्योत्स्ना जी आप की इस रचना से बहुत प्रभावित हूँ अपनत्व की पराकास्था दिखाई है आप ने इस रचना मेंमें क्यों ना झगड़े ?
मैं उसका हूँ
वो मुझको अपना समझती है
मेरा प्रणाम स्वीकार करे
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

: केवल राम : said...

मैं चाहता हूँ,
उसको हमेशा घेरे रहूँ।
पर वो है कि,
अकेले में बात करती है।

बेहतर समझा है उसे ..उसने ..प्यार के मनोविज्ञान को अभिव्यक्त करती सार्थक प्रस्तुति

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!!

वाणी गीत said...

बहुत खूबसूरत ख़याल है !

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

jyotsnaa ji... umdaa likha hai... aaj aapki yah post charchamanch par hai... aap bhi vaha aa kar apne vicharo se abhibhut karen ..hamen anugrahit karen ..dhanyvaad ..
aur amritras blog me bhi aapka swagat hai..

http://charchamanch.blogspot.com/2011/03/blog-post_04.html

http://amritras.blogspot.com

Rakesh Kumar said...

"मैं उसका ख्याल हूँ .."
वाह ! क्या बात है .
चर्चा मंच से आपकी पोस्ट पर आना हुआ .अति सुंदर अभिव्यक्ति .मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा ' पर आपका हार्दिक स्वागत है .

Kailash C Sharma said...

उसे हर वक़्त मेरा ही ख़याल रहता है
और मैं ये भी जानता हूँ कि
मैं उसका 'ख़्याल' हूँ......

बहुत ही सुन्दर अह्सासपूर्ण ख़याल...बहुत सुन्दर

Sadhana Vaid said...

बहुत सुन्दर और आत्मीयता से परिपूर्ण रचना ! बधाई एवं शुभकामनायें !

Dr (Miss) Sharad Singh said...

उसे हर वक़्त मेरा ही ख़याल रहता है
और मैं ये भी जानता हूँ कि
मैं उसका 'ख़्याल' हूँ......

सुन्दर और भावपूर्ण कविता.. ...

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