Thursday, June 17, 2010

***जुनून***

पा लूँ तुझे ये थी आरजू
हर सिम्त में ढूँढा किये
रहे भटकते हम दर-बदर
जलाए आँखों के दिए .....

तेरी जुस्तजू से "जु" लिया,
तेरे नूर से मुझे "नू" मिला .
तू नहीं मिला है यही गिला,
इस बात का ये मिला सिला--
मेरी आँखों में कुछ नमी-सी है,
उस नमी से "न" को चुरा लिया

एक "जु नू न" यूं पैदा किया ....
अब तू मिलेगा या नहीं,
ये सोचना मुझको नहीं ,

रहा मुझमें दम या दम, बेदम हुआ
तुझे ढूँढ लायेगा ऐ खुदा!
मेरे जुनून में गर दम हुआ .......

43 comments:

अग्निमन said...

wow sachi kay bat hai bahut manjumaye kavita hai

संजय भास्कर said...

आप बहुत सुंदर लिखती हैं. भाव मन से उपजे मगर ये खूबसूरत बिम्ब सिर्फ आपके खजाने में ही हैं

संजय भास्कर said...

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

श्यामल सुमन said...

इक जुनून की आपने किया है अनुपम खोज।
यही भाव जिन्दा रहे चाह सुमन हर रोज।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

kshama said...

Bahut sundar 'junoon'hai yah!

कमलेश वर्मा said...

junoon ki vkhya karne ka ''junoon'' tarref ke kabil hai ..baahut umda

संजय कुमार चौरसिया said...

aapke junoon ko mera salam
bahut hi sundar bhav

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

रश्मि प्रभा... said...

जूनून में दम नज़र आता है....

shikha varshney said...

wow शानदार जूनून ...

अल्पना वर्मा said...

इस 'जुनून' का बनना अद्भुत लगा!कमाल की सोच !वाह!

अजय कुमार said...

मस्त अंदाज की सुंदर रचना

दिलीप said...

waah bahut khoob....

राजेश उत्‍साही said...

मुबारक हो आपका यह जुनून।

sakhi with feelings said...

bahut dil se likhi gayee rachna

महफूज़ अली said...

बहुत सुंदर....कितना सुंदर लिखा है....

दीपक 'मशाल' said...

ऐसा जूनून रहा तो जरूर ढूंढ लाएगा.. बढ़िया..

वाणी गीत said...

जूनून इस तरह लिया एक- एक शब्द से ...
ढूंढ लाये खुदा ...
अच्छी लगी कविता...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

जुनून..........वाह...बहुत खूबसूरत...

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा रचना!

Rajendra Swarnkar said...

ज्योत्सनाजी

आरज़ू जब जुनून बन जाए तो कामयाबी क़दम चूमती है ।
आपका जुनून क़ाबिले-ता'रीफ़ है !
ख़ूबसूरत जज़्बातों के लिए मुबारकबाद !

- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

प्रदीप मानोरिया said...

बहुत सुन्दर भाव पूर्ण रचना बधाई
कृप्या मेरे ब्लोग पर पधार कर मौन की पौन पढें

Prem Farrukhabadi said...
This comment has been removed by the author.
वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत सुन्दर कविता है ज्योत्सना जी. बधाई.

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब ... इस जुनून में लिखी नज़्म बहुत कमाल की है ...

Aparna Manoj Bhatnagar said...

बहुत सुन्दर रचना ! लिखने का ये जुनून बना रहे और अच्छी रचनाएँ पढ़ने के लियें मिलती रहें - शुभकामनाओं के साथ - अपर्णा

आदेश कुमार पंकज said...

bahut sunder

JHAROKHA said...

रहा मुझमें दम या दम, बेदम हुआ
तुझे ढूँढ लायेगा ऐ खुदा!
मेरे जुनून में गर दम हुआ ....
Bahut sundar abhivyakti-----.
Poonam

Tripat "Prerna" said...

wah wah! kya baat hai!

log on http://doctornaresh.blogspot.com/

i just hope u will like it!

डॉ .अनुराग said...

subhanallah!!!!!!!

गुलज़ार की एक नज़्म है .जिसे रेखा भारद्वाज ने गया है .तेरी जुस्तजू में जलते रहे...............

its one of your finest...

शहरोज़ said...

ज़िंदगी से लय का ख़ात्मा होता जा रहा ऐसे समय आपकी कवितायें सुकून देती हैं.और ज़िन्दगी से लबरेज़ पल भी.

स्वाति said...

कमाल की रचना है..जुनून अद्भुत हैं.

निर्मला कपिला said...

यही जनून बना रहे यही आशीर्वाद है बधाई

बेचैन आत्मा said...

जुनून...वाह! शब्दों का क्या तिलस्म है.

सर्प संसार said...

आपसे असहमति का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
---------
क्या आप बता सकते हैं कि इंसान और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है?
अगर हाँ, तो फिर चले आइए रहस्य और रोमाँच से भरी एक नवीन दुनिया में आपका स्वागत है।

hem pandey said...

ऐसा 'जु नू न' ! वाह !

hem pandey said...

ऐसा 'जु नू न' ! वाह !

संत शर्मा said...

Yadi junun sachcha hai to khuda kab tak chhupa rahega aapse. Sundar kavita.

Avinash Chandra said...

behad khubsurat ...madhurim kavita

Akshita (Pakhi) said...

बहुत सुन्दर गीत..खूबसूरत.

***************************
'पाखी की दुनिया' में इस बार 'कीचड़ फेंकने वाले ज्वालामुखी' !

ashutosh said...

ये कविता कम अंकगणित ज्यादा है ,संभव है ये कमेन्ट पब्लिश न किया जाए |मगर ये सच है कि इस अंकगणित के अंकों को अगर इस पूरी रचना से निकाल दिया जाए ,तो ये सिर्फ और सिर्फ पटरियों पर बिकने वाली "१०१ बेहतरीन शेर "जैसी किताब का हिस्सा नजर आएगी |हाँ ये बात दीगर है कि ज्योत्सना जी कविताओं की खरीददारी और बिक्री जानती हैं ,ऐसे में जो कमेन्ट आये हैं वो समीचीन हैं |

अरुणेश मिश्र said...

रचना मे शिल्पगत चमत्कार कथ्य के सौन्दर्य की अभिवृद्धि करता है । शब्दों की व्यञ्जना ने रचना को प्रभावी बना दिया है ।
प्यार और जुनून समानधर्मा है ।
प्रशंसनीय ।

aseem mitra said...

ma'am aap waakai bohot achha likhte hai bhawnay aatma tak ja kr sparsh krte hai,sahajta saralta k sath kaash hum bhi likh pate ye khwish jag jate hai

amit victory said...

gud yar

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