Sunday, January 9, 2011

" साक्षात्कार : भोजपुरी कवि श्री अनिरुद्ध जी "

------------------------------------श्री अनिरुद्ध जी---------------------------------
भोजपुरी साहित्य के गौरव , सुमधुर भोजपुरी गीतों के रचयिता, कवि श्री अनिरुद्ध जी इन दिनों गुजरात राज्य की यात्रा पर हैं , और गांधीनगर में निवास कर रहे हैं. प्रस्तुत है उनसे की गयी साहित्यिक वार्ता का संक्षेप-

१- प्रश्न - अपने विषय में कुछ बताएं..
उत्तर - मेरा जन्म बिहार राज्य के सारण जिले के डीहीं ग्राम में ९ मार्च १९२८ को हुआ . पिता स्व० श्री जगदेव सहाय स्वयं उर्दू व फारसी के प्रकांड विद्वान थे. हाईस्कूल तक की शिक्षा राजपूत हाईस्कूल से, तदोपरांत इंटरमीडिएट (कला) राजेन्द्र कालेज, छपरा से प्राप्त की.
१९४८ में विवाह के उपरांत कुछ पारिवारिक उलझनों के कारण अध्ययन स्थगित करना पड़ा. १९५० से बेसिक स्कूल में अध्यापन कार्य प्रारम्भ किया, १९६४ मे प्रधानाचार्य नियुक्त हुआ, और इसी पद से १९८६ में अवकाश ग्रहण किया....

२- प्रश्न- क्या सृजन कार्य अब भी जारी है ?
उत्तर - हाँ ! जारी है. एक काव्य संग्रह "पनिहारिन" प्रकाशित हो चुका है. इसके अतिरिक्त "भोजपुरी काव्य संग्रह" , "भोजपुरी गज़ल संग्रह", मेघदूतम का भोजपुरी भाषा में अनुवाद व "कृष्ण-लीला" नामक एक गीत नाटिका (इसमे मथुरा गमन तक का चित्रण किया गया है) प्रकाशन की प्रतीक्षा में हैं.

३- प्रश्न- हिंदी खडी बोली में भी लिख सकते थे , फिर भोजपुरी को लेखन का माध्यम चुनने का कारण क्या है ...?
उत्तर- राजेन्द्र कालेज के प्राचार्य पूज्य मनोरंजन बाबूजी ने भोजपुरी में लिखने को प्रेरित किया, उन्होंने कहा- हिन्दी में बहुत से लोग लिख रहे हैं, तुम अपनी प्रतिभा मातृभाषा को समर्पित करो, मैं हरसंभव सहयोग करूँगा....बस ! तभी से मैंने भोजपुरी भाषा को अपनी रचनाओं का प्रधान माध्यम माना ... हिंदी खड़ी बोली में भी कुछ स्वतंत्र रचनाएँ लिखी.

४- प्रश्न- भोजपुरी भाषा में लेखन की चुनौतियां क्या है, तथा भाषा के प्रति उदासीनता का क्या कारण मानते हैं ..?
उत्तर- किसी भी भाषा का सम्मान तभी संभव है, जब उसका सम्बन्ध साहित्य से हो, व्याकरण की शुद्धता से हो, भाषा में एक चुम्बकीय आकर्षण हो , मैं तो इसी विचार व दृष्टिकोण के साथ भोजपुरी कविताओं व गीतों की रचना करता हूँ.......
आजकल भोजपुरी भाषा में प्रयुक्त द्विअर्थी सम्वाद उसे "अश्लील भाषा" कहलाने के लिए उत्तरदायी है. जिस कारण भोजपुरी भाषा को निजभाषा कहने में कुछ लोगों को हीनता का बोध होता है, आजकल वही साहित्य परोसा जाता है, जिसे जनसामान्य आसानी से पचा सके व उसका रसास्वादन कर सके..... मेरा सोचना यही है कि यह भी एक कारण हो सकता है भाषा के प्रति बुद्धिजीवियों की उदासीनता का.... प्रसारण माध्यमो से भोजपुरी भाषा का जो स्वरुप सामने आ रहा है ,वह व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध नहीं है...

५- प्रश्न- हिंदी नव जागरण में देशभाषा का जागरण आवश्यक था , हिंदीभाषी प्रदेशों में अवधी व भोजपुरी क्षेत्र भाषाएँ प्रमुख होने पर भी , आधुनिक भारत में इसका अभाव क्यों है ?
उत्तर- हिन्दी नव जागरण में देश भाषा का जागरण आवश्यक था, परन्तु देश में हो रहे देशव्यापी स्वतंत्रता आन्दोलनों में जन जागरण भी आवश्यक था... शायद यही कारण है, कि एक देश एक भाषा की नीति को प्रमुखता से रखा गया और इस जागरण काल में हिन्दी खडी बोली साहित्यिक क्षेत्र में प्रमुखता से निखर कर आई, और क्षेत्रीय भाषाएँ पिछड़ गयी.

६- प्रश्न- हिन्दी साहित्य के इतिहास में अवधी, भोजपुरी, ब्रज आदि भाषाओं को सम्मान मिला है, आधुनिक हिन्दी साहित्य में इसका अभाव क्यों ?
उत्तर- आधुनिक हिन्दी साहित्य के इतिहास में भोजपुरी, अवधी, मैथिली व ब्रज आदि क्षेत्रीय भाषाएँ सम्मिलित नहीं यह क्षोभ का विषय है....क्षेत्रीय भाषाएँ क्षेत्र के भीतर ही सीमित रह गयी हैं...कारण, लोगों में लोक भाषाओं के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता का अभाव है.. किसी भी भाषा को उचित सम्मान मिले इसके लिए आवश्यक है, कि भाषा को भाषा का पूर्ण रूप देने की बात हो, भाषा को इतना सामर्थ्यवान बना दें कि वह जनसामान्य की भाषा हो जाए, और साहित्य जनसामान्य के लिए हो.... रामचरित मानस इसका उदाहरण है...

७- प्रश्न- भोजपुरी में कटनी, ओसवनी, रोपनी, दउनी आदि गीतों को लिखने का क्या औचित्य है ? क्या इनसे प्रेरणा मिलती है ? या ये उत्थान में सहायक हैं ?
उत्तर- हाँ ! इस प्रकार के गीत हमें हमारे कर्म के प्रति जागरूक रखते हैं, इनसे कर्म के प्रति उत्साहवर्धन की प्रेरणा मिलती है... जिन गीतों के द्वारा अपने कर्म के लिए कर्तव्यबोध की मंगल भावना जाग्रत हो, वे निश्चय ही उत्थान के कारक हैं...

८- प्रश्न- भोजपुरी में लेखन की प्रेरणा किससे मिली, व समकालीन भोजपुरी कवियों से कैसे सम्बन्ध रहे...?
उत्तर- मुख्य प्रेरणा स्रोत तो पूज्य मनोरंजन बाबू जी ही रहे किन्तु आचार्य महेंद्र शास्त्री, डॉ० राम विचार पाण्डेय, पं० श्याम नारायण पाण्डेय जी का वृहदहस्त सदैव शीश पर रहा...
प्रो० रिपुसूदन प्रसाद श्रीवास्तव, सतीश्वर सहाय वर्मा "सतीश", डॉ० उमाकान्त वर्मा, कविवर कन्हैया जी, पाण्डेय कपिल, डॉ० प्रभुनाथ सिंह, मूसा कलीम, मैनेजर पाण्डेय "मनमौजी" आदि से मित्रवत सम्बन्ध रहे...अर्जुन कुमार "अशांत" मेरे सहपाठी भी रहे, और अभिन्न मित्र भी...

९- प्रश्न- आजकल भोजपुरी भाषा में रचनात्मकता कितनी बढ़ी है , इसमें भाषा के योगदान को आप किस रूप में देखते हैं ?
उत्तर- भाषा जिस रूप में सामने आनी चाहिए, उस प्रकार नहीं आई.. रचनात्मकता तो निश्चितरूप से बढ़ी है... भोजपुरी में दूरदर्शन पर नाटकों की श्रृंखलाएं प्रसारित हो रही हैं , भोजपुरी में फ़िल्में बन रही हैं , इस सबका सम्बन्ध कहीं न कहीं साहित्य से है.. परन्तु भाषा का स्तर घटा है.

१०- प्रश्न- संविधान की आठवीं सूची में क्षेत्रीय भाषा मैथिली ने स्थान पा लिया है, भोजपुरी ने नहीं, क्या ऐसा सरकारी योगदान की कमी के कारण है ?
उत्तर- सरकारी योगदान का अभाव तो है, पर मेरा ऐसा मानना है कि मुख्य कारण भाषा का पूर्णरूपेण परिष्कृत न होना ही है..मैथिली पूर्णरूपेण शुद्ध व सिद्धांतों पर आधारित भाषा है, इसलिए यह सम्मानित भाषा है, और संविधान की आठवीं सूची में स्थान पाने की अधिकारिणी भी है...

११- प्रश्न- भूमंडलीकरण के इस दौर में लोक भाषाओं के भविष्य को कैसे देखते हैं?
उत्तर- भाषा को सर्वव्यापक बनाया जाए, भाषा सर्वग्राह्य हो ये ध्यान में रखते हुए, ऐसी रचनाओं का सृजन किया जाए जो सभी के लिए हों, तो लोकभाषाओं का भविष्य भी निश्चित ही सुन्दर होगा












-------------------------मै,श्री अनिरुद्ध जी के साथ

31 comments:

nilesh mathur said...

लोक भाषा में हमारी जड़ें छुपी होती है, जिसे जिन्दा रखना सचमुच जरुरी है!

राजेश उत्‍साही said...

ज्‍योत्‍सना जी यह साक्षात्‍कार अनिरूद्ध जी के साथ साथ,भोजपुरी तथा आपके व्‍यक्तित्‍व से भी परिचित कराता है। बधाई।

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

इस साक्षात्कार को आप सभी लोगों तक पंहुचाने में श्री अमरेन्द्र जी का सहयोग मिला, जिस हेतु उन्हें धन्यवाद!
@ नीलेश जी, आपका कथन सत्य है, धन्यवाद!
@राजेश जी,आपकी अभिव्यक्ति के लिए आभार!

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

सुन्दर ..
देश भाषाओं के ये अलक्षित पक्ष सामने आने चाहिए ..
अंतर्जाल की ख़ूबसूरती ही कहूंगा कि ऐसे उपयोगी कार्य अब किसी पत्रिका या सम्पादक या सरकारी सहयोग/कृपा के मुखाकांक्षी नहीं रहे ! अब जन ही ले आयेंगे अपने सहस्रों ऊर्जा-स्फूर्त कंठों से जनभाषाओं को जो चिर उपेक्षा की शिकार रहीं ! इस दृष्टि से आपने ठेठ जन-कार्य की सराहना करूंगा !

बातें बहुत बंधी रूप में आयी हैं , फिर भी भाषाई विसंगति की विभीषिका का सहज अनुमान लगाया जा सकता है ! ये बातें लोगों के विचारार्थ रख दी गयी हैं , लोगों को विचार करना चाहिए !

अनिरुद्ध जी उस भाषा में रचनाशील रहे जिसमें भखारी ठाकुर जैसे क्रान्तिदर्शी जननायक साहित्यकार हुए , सो उनके लीक से हटे और इस दृष्टि से चुनौतीपूर्ण साधन-कर्म को नमन !

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

@ इस दृष्टि से आपने ठेठ जन-कार्य की सराहना करूंगा !
--- यहाँ '' आपने '' की जगह ''आपके '' रहेगा . टाइप की असावधानी ! क्षमाप्रार्थी हूँ !

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

क्षेत्रीय भाषाओं में सृजनात्‍मकता पर कवि श्री अनिरूद्ध जी के विचार अनुकरणीय हैं, आपको एवं सहयोगी अमरेन्‍द्र भाई को धन्‍यवाद.

mukti said...

ज्योत्स्ना जी,
इस साक्षात्कार द्वारा अनिरुद्ध जी से परिचय कराने के लिए आपको धन्यवाद और साधुवाद !
मेरी मातृभाषा भी भोजपुरी ही है, पर उस क्षेत्र में पले-बढ़े ना होने के कारण मुझे भोजपुरी साहित्यकारों से परिचय नहीं है, सिर्फ़ भिखारी ठाकुर और महेंद्र जी के विषय में ज्ञान है. इस साक्षात्कार के द्वारा मेरी ज्ञानवृद्धि में सहायता हुयी. धन्यवाद !

संजय भास्कर said...

आदरणीय ज्‍योत्‍सना जी
नमस्कार !
यह साक्षात्‍कार अनिरूद्ध जी व्‍यक्तित्‍व से भी परिचित कराता है। बधाई।

संजय भास्कर said...

आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ, क्षमा चाहूँगा,

मनोज कुमार said...

ज्योत्सना जी, इस महान विभूति से परिचय कराकर आपने न सिर्फ़ हमारा ज्ञानवर्धन किया बल्कि उनकी रचनाशीलता के बारे में भी पता चला।
आभार इस प्रस्तुति के लिए और अमरेन्द्र जी को धन्यवाद इस पोस्ट का लिंक देने के लिए।

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

@ अमरेन्द्र भाई, ईश्वर आपके कंठ से स्फूर्त स्वरों को ऊर्जा प्रदान करे, निश्चित ही ये स्वर दूर तक जायेंगे और उत्साहवर्धन करेंगे.

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

अनिरुद्ध जी के व्यक्तित्व की एक झलक यहाँ प्रस्तुत है, इनकी कविताओं और गीतों से आपका परिचय कराना अभी शेष है.
हिंदी के श्रेष्ठ साहित्यकारों द्वारा अनिरुद्ध जी के गीतों पर दी गयी सम्मतियाँ व इंटरमीडिएट और स्नातक की कक्षाओं में भोजपुरी साहित्य में पढ़ाई जाने वाली कुछ रचनाएँ भी आपके सामने शीघ्र ही होंगी.

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

@संजीव जी, @मुक्ति जी, @संजय भास्कर जी, @ मनोज जी लोकभाषा के समर्थन में आप सभी को साथ पाकर गौरान्वित हूँ, आप सभी को ह्रदय से आभार!

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

फेसबुक पर आया सन्देश-- Gyanendra Shukla 10 January at 11:27 Report
बेहद सारगर्भित औऱ प्रेरणादायक इंटरव्यू है....

अरुण देव said...

ज्योत्स्ना जी,
साक्षात्कार के लिए धन्यवाद .
unke ek do geet bhi hone chahiye the..
prshn aapke achhe hain.

Udan Tashtari said...

बहुत आभार परिचय करवाने का.

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

फेसबुक पर आया सन्देश- Bhartendu Mishra 10 January at 19:46 Report
ज्योत्सना जी सचमुच बहुत अच्छा काम किया आपने ।ऐसे ही चुनिन्दा लोक भाषा के कवियो से बातचीत संकलित करती रहे यह बडी साहित्य सेवा होगी।

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

@अरुण जी, आपसे सहमत हूँ,इस प्रस्तुति के दूसरे चरण में कवि के गीत व सम्मतियाँ प्रस्तुत करूंगी....आशा है इसीप्रकार मार्गदर्शन करेंगे.

@समीर जी,आपने इस साक्षात्कार पर नज़र डाली,ये मेरे लिए सौभाग्य की बात है..

आप दोनों को ही धन्यवाद!

Mukesh Kumar Sinha said...

sach me mitti se judi bhashayne apni soundhi mahak ko inn jaise bade logo ke karan hi suvasit kar pati hai..:)

dhanyawad jyotsana jee, waise logo se milwane ke liye, jo hamare jaiso ke liye prerna ho sakte hain...:)

विजय तिवारी " किसलय " said...

कवि श्री अनिरुद्ध जी का साक्षात्कार एवं भोजपुरी के प्रति लगाव को दर्शाता ये साक्षात्कार रोचक एवं दिशादर्शी है.
- विजय तिवारी ' किसलय '

अविनाश said...

जान पढ़ कर बहुत अच्‍छा लगा।

संजय भास्कर said...

आदरणीय ज्योत्स्ना जी
नमस्कार !
ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.
किस बात का गुनाहगार हूँ मैं....संजय भास्कर
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
धन्यवाद

Avinash Chandra said...

यह साक्षात्कार बहुत अच्छा लगा

जेन्नी शबनम said...

jyotsna ji,
bhojpuri kavi shree aniruddh ji ke saath aapka saakshaatkaar padhkar mann prasann hua. bahut achhi tarah se aapne vaarta kiya hai. shubhkaamnaayen.

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

बेहतरीन एवं प्रशंसनीय प्रस्तुति ।

Shambunath said...

मैं व्यथा हूँ हृदय की
प्रत्येक सहृदय की
करुना भी मेरा नाम
कल्पित हृदय का दाह
कचोटता क्यों मन को?
दे नही सकती शीतलता
तो हे देव!
ज्योत्स्ना क्यों मेरा नाम?
------------------------
कवितारुपी आपका ये परिचय भा गया...
बेहतरीन प्रयास है लिखते रहिए.....

DR.MANISH KUMAR MISHRA said...

आपके आलेख आमंत्रित हैं.
आपके आलेख आमंत्रित हैं
'' हिंदी ब्लॉग्गिंग '' पर january २०१२ में आयोजित होनेवाली राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए आप के आलेख सादर आमंत्रित हैं.इस संगोष्ठी में देश-विदेश के कई विद्वान सहभागी हो रहे हैं.
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इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें --------------
डॉ.मनीष कुमार मिश्रा
के.एम्. अग्रवाल कॉलेज
पडघा रोड,गांधारी विलेज
कल्याण-पश्चिम ,४२१३०१
जिला-ठाणे
महाराष्ट्र ,इण्डिया
mailto:manishmuntazir@gmail.com
wwww.onlinehindijournal.blogspot.कॉम
०९३२४७९०७२६

Ramesh Sharma said...

प्रेरणादायक साक्षात्‍कार

लिखते रहिए...

नवीन said...

ज्योत्सना जी राउर बहुत बहुत धन्यवाज जे रउवा भोजपुरी के एगो स्तम्भ से पुरा दुनिया के परिचय करवनी ।

बहुत बहुत धन्यवाद !

sumeet "satya" said...

jyotsana ji aniruddh ji ka interview accha laga........aise hi logon ko samane lane ki jarurat hai

abhi said...

बहुत अच्छा अनिरुद्ध जी का साक्षात्कार..
शुक्रिया इसे पोस्ट करने के लिए.

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