Monday, July 27, 2009

चाँदनी हूँ

चाँद से मिलकर मैं निखर जाऊंगी
चाँदनी हूँ छत पर उतर जाऊंगी ......

सोचा न था लफ्जों में उतर सकती हूँ
एक दिन तेरी ग़ज़लों में भर जाऊंगी.....
(साभार-- मासूम शायर)

खाते हो झूठी क़समें भला क्यों
क्या करोगे कभी जो गुज़र जाऊंगी......

दूर तुमसे रहूँ भी तो कैसे सनम?
अब तुम्हें छोड़ कर मैं किधर जाऊंगी ......

तुमसे मिलने से पहले थी बेजार मैं
तुम मिले हो अब मैं संवर जाऊंगी........

तेरे ख्यालों से अब जी भरता नहीं
तुम संभालो नहीं तो बिखर जाऊंगी ......

चाँदनी ने कहानी लिखी दर्द की
चाँद के बिना मैं तो मर जाऊंगी.... ...

39 comments:

varsha said...

बहुत ही खूबसूरत अभिव्यक्ति।

अनिल कान्त : said...

चाँदनी चाँद की ही तो होती है ........
सुन्दर रचना

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

ओम आर्य said...

chand our chandniek dusare kebina adhure vi hote hai........lazami hai mar jana ek dusare ke bina

श्यामल सुमन said...

खाते हो झूठी क़समें भला क्यों
क्या करोगे कभी जो गुज़र जाऊंगी

बहुत खूब ज्योत्सना जी। चलिए आपकी तरफ से, आपके ही तर्ज पर मैं भी कुछ जोड़ दूँ-

गम न करना अगर दूर हो भी गयी
याद करना मुझे तुम नजर आऊँगी

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

mehek said...

खाते हो झूठी क़समें भला क्यों
क्या करोगे कभी जो गुज़र जाऊंगी......

दूर तुमसे रहूँ भी तो कैसे सनम?
अब तुम्हें छोड़ कर मैं किधर जाऊंगी
lajawab gazal

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ज्योत्सना पाण्डेय जी।
बहुत खूबसूरत गज़ल प्रस्तुत की है।
बधाई!

"लोकेन्द्र" said...

ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति की प्रस्तुति......

M VERMA said...

चाँदनी ने कहानी लिखी दर्द की
चाँद के बिना मैं तो मर जाऊंगी.... ...
खूबसूरत जज्बात --
बहुत अच्छी रचना

विनोद कुमार पांडेय said...

सोचा न था लफ्जों में उतर सकती हूँ
एक दिन तेरी ग़ज़लों में भर जाऊंगी.....

sundar bhav..badhayi..ho..

डॉ. मनोज मिश्र said...

चाँदनी ने कहानी लिखी दर्द की
चाँद के बिना मैं तो मर जाऊंगी.... ...
अभिव्यक्ति की खूबसूरती दर्शनीय है.

महेन्द्र मिश्र said...

चाँद से मिलकर मैं निखर जाऊंगी
चाँदनी हूँ छत पर उतर जाऊंगी .

बहुत ही खूबसूरत...

Nirmla Kapila said...

सोचा न था लफ्जों में उतर सकती हूँ
एक दिन तेरी ग़ज़लों में भर जाऊंगी.....
बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति आभार्

महफूज़ अली said...

bahut hi khoobsoorat kavita..... dil ko choo lene wali

yuva said...

खाते हो झूठी क़समें भला क्यों
क्या करोगे कभी जो गुज़र जाऊंगी......

Kya aagaaj kiya hai aapne. Bahut khoob

Udan Tashtari said...

चाँदनी ने कहानी लिखी दर्द की
चाँद के बिना मैं तो मर जाऊंगी

वाह!! बहुत उम्दा!! सुन्दर अभिव्यक्ति!!

ρяєєтι said...

Chand ki chandni acchi lagi...!
saadar sneh sang badhai...

Shashank Pandey said...

rochak abhivyakti
padh kar aanand mila
apna kaarya mein isi prakaar se nirantartaa banaye rakhein

बवाल said...

ज्योत्स्ना जी,
ये बतलाइए आपने इतनी सुन्दर ग़ज़ल क्यों लिखी भला ? अब आपको नज़र लग जाएगी ना। हाँ नहीं तो। हा हा । मालिक आपकी लेखनी को और बरकत दे।

हिमांशु । Himanshu said...

शानदार और खूबसूरत रचना । धन्यवाद ।

प्रदीप मानोरिया said...

४० दिन के बाद आपका ब्लोग जगत में आगमन आपके अच्छे स्वास्थ्य की ओर इंगित करता है .. आशा है आपका स्वास्थ्य अब ठीक होगा ..
रचना में प्लावित स्फ़ूर्तता इस का बयान कर रही है । मेरी गज़ल मिल्ने की प्यास रहने दे अवश्य पढें .. अनुरोध है

sada said...

बहुत ही बेहतरीन रचना जिसके लिये आपको बधाई ।

masoomshayer said...

bahut dil ko choo lene walee abhivkati hai sarhana ke liye chand se shabd utaar ke lanbe honge

masoomshayer said...

bahut dil ko choo lene walee abhivkati hai sarhana ke liye chand se shabd utaar ke lanbe honge

रंजना [रंजू भाटिया] said...

खुबसूरत लगी यह रचना बहुत बढिया

MANVINDER BHIMBER said...

bahut sunder likha hai aapne .....lajwaab

नीरज गोस्वामी said...

बहुत अच्छी रचना...ज्योत्स्ना जी बधाई..
नीरज

रश्मि प्रभा... said...

अति कोमल,खूबसूरत एहसास

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

चांद की चांदनी, जीवन के स्‍वप्‍न, जीवंत.

आभार.

Pakhi said...

Bahut sundar likhti hain ap.kabhi mere blog par bhi ayen.


पाखी के ब्लॉग पर इस बार देखें महाकालेश्वर, उज्जैन में पाखी !!

raj said...

चाँदनी ने कहानी लिखी दर्द की
चाँद के बिना मैं तो मर जाऊंगी
mere pas lafaz nahi kahne ko,etna pyara likha apne..amazing....

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

बहुत खूब ज्योत्स्ना जी एक बेहतरीन गजल है भावो के साथ शब्दों का सयोंजन भी आप ने बहुत सरल रखा है
खाते हो झूठी क़समें भला क्यों
क्या करोगे कभी जो गुज़र जाऊंगी......
मेरा प्रणाम स्वीकार करे
सादर प्रवीण पथिक
9971969084

शोभना चौरे said...

bhut sundar bhvabhvykti

shama said...

कितनी सच्चाई है इन अल्फाजों में !

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://lalitlekh.blogspot.com

http://shama-baagwaanee.blogspot.com

http://shama-kahanee.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

अर्शिया अली said...

Bahut sundar ghazal kahee hai aapne.
{ Treasurer-T & S }

life is beautiful said...

aajkal kahan chandni ka sacha pyar dekha jaata hai?kavita mein chandni ke sacche pyar or uski dard ko acchi tarah smeta hai aapne.....

shama said...

बिखरे सितारे ! ७) तानाशाह ज़माने !
पूजा की माँ, मासूमा भी, कैसी क़िस्मत लेके इस दुनियामे आयी थी? जब,जब उस औरत की बयानी सुनती हूँ, तो कराह उठती हूँ...

लाख ज़हमतें , हज़ार तोहमतें,
चलती रही,काँधों पे ढ़ोते हुए,
रातों की बारातें, दिनों के काफ़िले,
छत पर से गुज़रते रहे.....
वो अनारकली तो नही थी,
ना वो उसका सलीम ही,
तानाशाह रहे ज़माने,
रौशनी गुज़रती कहाँसे?
बंद झरोखे,बंद दरवाज़े,
क़िस्मत में लिखे थे तहखाने...


Aapka rav chna sansaar dekha to behad prabhavit huee..khudko chabdanee kah,kiseeke chhat pe utarne kaa komal khyal..! Kitna madhur..anokha!

sneh poorvar se amtarit karne aayee hun...aapki rahnumayee aur hausalaafzayee kee tamnna hai..

Dr. Tripat said...

chandni aur chand ka ati uttam sambhandh ko bahut ache shabdon mein wyakt kiya hai aapne..

Durga Nandan said...

My real name is Jyotsna. :)
Nice poems you have in here. :)
Cheerz!
Durga

Rakesh said...

are wah
socha na tha lafjon mein uter jaungi ....wah....bahut hi sunder jyotsnaji badhai

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